‘योगः कर्मसु कौशलम्’ कर्मों में कुशलता ही योग है।– कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा

वॉयस ऑफ बनारस।
वाराणसी। ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ कर्मों में कुशलता ही योग है। कुछ विद्वानों का यह मत है कि जीवात्मा और परमात्मा के मिल जाने को कहते हैं। ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’ चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है।योग शांति का आश्रय प्रदान करता है, जो हमें जीवन की चुनौतियों का सामना शांति और धैर्य के साथ करने में सक्षम बनाता है।
काशी वासी सौभाग्यशाली हैं जहाँ से योग की उत्पत्ति हुई–

इससे शारीरिक, मानसिक मजबूती भी देता है।हम सभी सौभाग्यशाली हैं जो भारतीय हैं, जहां ऋषियों – मुनियों की तपोभूमि रही है।जहां से योग की उत्पत्ति हुई है।दुनिया भर में योग विद्या की उत्पत्ति काशी के आदि योगी बाबा विश्वनाथ जी को “आदियोगी” तथा “योगगुरु” माना जाता है।काशीवासी सौभाग्यशाली हैं जो इस धरा के साथ जुड़े हैं, जहां से योग की उत्पत्ति हुई है ,दुनियां ने योग को सुना, सीखा और आत्मसात किया।
उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने
11 वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर परिसर स्थित ऐतिहासिक मुख्य भवन में बतौर अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त किया।  यह धरती तर्पण, अर्पण, समर्पण लिए,योग, प्रयोग एवं उपयोग की धरती है–
कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि यह धरती असाधारण धरा है, यह धरती तर्पण, समर्पण, योग, प्रयोग, उपयोग की धरती है, यहां के असाधारण हैं।सम्पूर्णानन्द की कल्पना योग के बिना सम्भव नहीं है, दुनियां भर में इसी प्रांगण से योग के महत्व और उपयोगिता के संदेश जाना चाहिए।इसके लिए आप सभी योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने तथा दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान करें।स्वंय योग को आत्मसात करेंगे तो स्वस्थ रहते हुये अन्य लोगों को भी स्वस्थ जीवन की उपयोगिता और उद्देश्य योग के द्वारा बता सकेंगे।आपसे ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र और स्वस्थ विश्व की कल्पना साकार होगी।

अनुलोम- विलोम योग के अभ्यास को स्वास्थ्य विशेषज्ञ बहुत लाभदायक मानते हैं-
कुलसचिव राकेश कुमार ने कहा कि इस संस्था में योग से संबंधित पाठ्यक्रम का संचालन किया जाता है, जो कि इसके प्राच्यविद्या के महत्व को दर्शाता है।शरीर के सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित योगासन के अंतर्गत अनुलोम- विलोम अवश्य करना चाहिए, विशेषज्ञ भी लाभदायक मानते हैं। विद्वानों ने योग को साधना और एकाग्रता बताया–उस दौरान वेदांत के विद्वान प्रो• रामकिशोर त्रिपाठी ने योग को साधना और एकाग्रता का केंद्र विन्दु बताया, न्याय शास्त्र के विद्वान प्रो रामपूजन पाण्डेय,प्रो हरिप्रसाद अधिकारी ने भी अपने विचार व्यक्त किया।
सूर्य नमस्कार योग मुद्रा का आयोजन–
राजभवन के निर्देश के आलोक में योग दिवस के अवसर पर पूर्वाह्न 8:00 बजे विश्वविद्यालय परिवार के द्वारा सामूहिक रूप से सूर्य नमस्कार योग मुद्रा का वृहद् आयोजन किया गया।
प्रधानमंत्री जी के उद्बोधन की लाइव स्ट्रीमिंग (प्रसारण)—
इसके पूर्व प्रात: 6:30 बजे, योगसाधना केन्द्र में योग दिवस के अवसर पर मा. प्रधानमंत्री जी के उद्बोधन की लाइव स्ट्रीमिंग (प्रसारण) को कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा जी की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय परिवार के द्वारा देखा गया।
योग प्रशिक्षक- प्रशिक्षण–योगी आदित्य कुमार एवं योगी राजकुमार मिश्र ने विभिन्न योगों के प्रयोग, विधि एवं उपयोगिता को प्रायोगिक विधि से सम्पूर्ण प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के प्रारम्भ में–वैदिक मंगलाचरण,पौराणिक मंगलाचरण—मंच पर आसीन अतिथियों के द्वारा माँ सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन।स्वागत और अभिनंदन–संयोजक द्वारा मंच पर आसीन अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत और अभिनंदन इस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रो शैलेश कुमार मिश्र ने किया।
उक्त अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार, वेदांती प्रो• रामकिशोर त्रिपाठी,प्रो रामपूजन पाण्डेय,प्रो हरिशंकर पाण्डेय, प्रो सुधाकर मिश्र, प्रो हरिप्रसाद अधिकारी,प्रो विधु द्विवेदी, प्रो शैलेश कुमार मिश्र, प्रो राघवेन्द्र जी दुबे, प्रो दिनेश कुमार गर्, प्रो अमित कुमार शुक्ल,प्रो हीरक कांत चक्रवर्ती, प्रो महेंद्र पाण्डेय,प्रो विद्या कुमारी चंद्रा आदि अधिकारी, कर्मचारी एवं सैकड़ों विद्यार्थियो ने सहभाग किया।

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